



कौवा को खिलाने से मिलते हैं शुभ संकेत
बरेली।, टेलीग्रामहिन्दी। भाद्रपद पूर्णिमा से महालय श्राद्ध यानी पितृपक्ष प्रारंभ हो गया है। इस पक्ष में पितरों की प्रसन्नता के लिए पंचबली का विधान धर्म शास्त्रों में बताया गया है। पंचबली करने से पितृ, देव, जीव- जंतु ,पशु इत्यादि तृप्त होते हैं। बलि का अर्थ समर्पण रूप से भोग देना। पंच का मतलब है पांच के लिए। जिसमें गाय, कुत्ता, चींटी, कौवा और देवता शामिल है। इनको भोग देने से अनन्य पुण्य की प्राप्ति होती है और घर से सभी क्लेश, रोग दोष समाप्त होते हैं। सुख समृद्धि यश वैभव संपन्नता बनी रहती है। इसलिए पंचबली का कनागत के महीने में विशेष महत्व माना गया है।

आचार्य पंडित मुकेश मिश्रा
आचार्य पंडित मुकेश मिश्रा ने बताया कि गौबलि धर्म शास्त्र अनुसार गाय में 33 कोटि देवता वास करते हैं। इसलिए गाय माता के रूप में विशेष पूज्यनीय मानी गई है। गाय को खिलाने से 33 कोटि देवताओं को भोग लग जाता है।
स्वानबलि
स्वान कुत्ता को कहा जाता है और कुत्ते को यम देवता का पशु माना गया है। मान्यता है कि पितृपक्ष में कुत्ते को खिलाने पर जीवन से जुड़े सभी प्रकार के भय दूर होते हैं और मनुष्य दीर्घायु होता है।
काकबलि
काक कौवा को बोला जाता है और कौवे को यमराज का प्रतीक कहा गया है। कौवा से जीवन में शुभ और अशुभ संकेत जुड़े होते हैं। यानी कौवा को खिलाने से जीवन में शुभ संकेत मिलते हैं। पितरों से पूर्ण आशीर्वाद मिलता है।
देवादिबलि
पितर पूजा करते दौरान श्राद्ध में एक हिस्सा देवताओं के लिए भी दिया जाता है। जिसे देवादिबलि कहते हैं। यह भाग अग्नि माध्यम से देवताओं तक पहुंचता है। ऐसा करने से सभी देवताओं की कृपा मनुष्य पर बरसती है।
पिपीलिकादिबलि
पिपीलिका चीटियों को कहा जाता है। श्राद्ध दौरान पांचवां हिस्सा चींटी आदि अन्य कीड़े मकोड़े को दिया जाता है। इनको खिलाने से सभी ग्रह और पितृ प्रसन्न होते हैं। वंश वृद्धि करते हैं।

द्वार पर पितरों का स्वागत
श्राद्ध पक्ष में पितरों का स्वागत किया जाता है। घरों में प्रवेश द्वार पर पुष्प आदि स्वागत हेतु बिछाए जाते हैं। कुछ लोग द्वार पर विशेष सजावट फूल पत्तियों से देहली पर करते हैं।
