



संजय सैनी
नैमिषारण्य, टेलीग्रामहिन्दी। नैमिषारण्य संत लगातार सनातन धर्म पर हो रहे प्रहार और दुष्प्रचार से आहत उन्होंने कहा है कि औरंगज़ेब और मुगल इसे नहीं मिटा सके तो दिन में सपने देखने वाले क्या कर पाएंगे ? संतो ने कहा कि सनातन शाश्वत सत्य है इसका न आदि है न ही अंत है।
विगत दिनों तमिलनाडु मुख्यमंत्री पुत्र उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को डेंगू, मलेरिया आदि की संज्ञा देकर इसे समाप्त करने का आवाहन किया था। कुछ दिन बाद ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे ने भी स्टालिन के सुर में सुर मिला दिया। रही सही कसर कर्नाटक के एक मंत्री ने पूरी कर दी। इससे भारत के सनातनी ही नही भड़क उठे बल्कि देश के प्रधानमंत्री भी आहत हुए। उन्होंने इसका पुरजोर विरोध करने की पार्टी कार्यकर्ताओं को छूट दे दी।

सनातन पर दिए गए जहरीले भाषणों से सियासी माहौल गर्मा गया है।
सनातन पर दिए गए कथित आपत्तिजनक बयान पर हिन्दुओं ने विरोध के स्वर तेज कर दिए। इस बीच कर्नाटक के एक विधायक के बयान ने आग में घी का काम कर दिया। पहले से आग बबूला सनातनी हिन्दू के साथ ही देश भर के संतो, महंतों और ऋषि-मुनियों ने साफतौर पर कहा कि सनातन को मिटाने वाले स्वयं ही मिट जाएंगे।
सनातन धर्म की गंगोत्री कहे जाने वाले नैमिषारण्य तीर्थ में स्थित श्री सत्यनारायण स्वामी मंदिर विजयवाड़ा (हैदराबाद) की संचालिका व संन्यासिन माता श्री रामानुजानंद ने कहा कि स्टालिन कौन है ? सनातन को मिटाने की बात करता है, मालूम हो कि भगवान ने सनातन के विरोधी राक्षसों का संहार किया। अब कलयुग है। ऐसे सनातन विरोधियों को भोगना ही पड़ेगा।
ब्रम्हलीन जगदाचार्य स्वामी नारदानंद जी सरस्वती महाराज आश्रम के दंडी ऋषि श्री देवेन्द्रा नंद जी महाराज ने कहा कि अचलओहम सनातन: अर्थात जिसका न कोई आदि है न ही अंत है। इस देश में राम कृष्ण तो हुए लेकिन इन लोगों ने सनातन धर्म की रक्षा की, इनसे पहले का सनातन है। रही बात भारत की तो भारत का अर्थ ही प्रकाश है। बोले-हमारे ऋषि-मुनि प्रकाश में जीते थे। इसलिए सनातन धर्म की कृपा न हो तो विरोध करने वाले बोल भी नहीं सकते। देवेन्द्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि युगों-युगों से चल रहा सनातन न कभी मिटा था, न कभी मिटेगा। इसको मिटाने वाले ही मिटते रहे हैं।
स्वामी हरिहरानंद महाराज ने कहा कि सनातन का मतलब ही है सदैव हरा-भरा रहने वाला। सनातन कभी न मिटा है न मिटेगा। यह शाश्वत है। इसको मिटाने वाले युगों-युगों से मिटते चले आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि ज्यों ज्यों-ज्यों भीगे कामली त्यों त्यों भारी होय, अर्थात जितना विरोध होगा सनातन धर्म और मजबूत होगा।
श्री ब्रम्हविज्ञान पीठ नैमिषारण्य अध्यक्ष परि ब्राजिका (संन्यासिन) कुमारी विश्व भारती ने डेंगू मलेरिया की सनातन से तुलना को अविवेक पूर्ण बताते हुए कहा कि उनके अंतरहृदय में विवेक का प्रकाश नहीं है इसलिए विरोधी ऐसा बोल रहे हैं। उन्होंने कहा कि रावण और कंस जब सनातन धर्म का बाल बांका नहीं कर सके तो इन लोगो की क्या बिसात। बोली-जहां धर्म है वहीं जय है। हमेशा से सनातन धर्म रहा है रहेगा। विश्व की कोई ताकत सनातन को मिटा नहीं सकती। देश में इंडिया भारत पर चल रही बयानबाजी पर उन्होंने कहा कि इंडिया एक आंग्ल शब्द है। इसे थोपा गया। मूल नाम भारत ही है। हमारे तमाम धर्म ग्रंथों और मंत्रो में में भी भारत का नाम का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है।

