एक इंटरव्यू पद्मश्री डॉ. अरविंद से……

ब्रासिका पर 22 अनुसंधान करा चुके पूर्व कुलपति रानी लक्ष्मीबाई कृषि विश्वविद्यालय

किसानों की आय दोगुनी करने और कई कठिन शोध पर कार्य करते हुए बुलंदियों तक पहुंचे पद्मश्री डॉ. अरविंद कुमार

बरेली, टेलीग्रामहिन्दी। बुंदेलखंड की धरती पर रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय स्थापित करने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रोफेसर डॉ. अरविंद कुमार को बीते मार्च माह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा सरसों के बीज में रैपिड शोध पर पद्मश्री मिला है। यह न सिर्फ उनके बल्कि समूचे रुहेलखंड के लिए बड़ी उपलब्धि है। डॉ. अरविंद कुमार को पद्मश्री मिलने के पीछे उनकी 40 साल की कठिन साधना है। रूहेलखंड में पीलीभीत निवासी डॉ. अरविन्द कुमार झांसी कृषि विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हुए हैं। वह अब घर पर रहकर ही कृषि वैज्ञानिकों का मार्ग दर्शन करते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार सुधाकर शुक्ल से विभिन्न शोध और उपलब्धियों पर उनसे विस्तृत बातचीत हुई। प्रस्तुत है रिपोर्ट –


प्रश्न~ अपनी संघर्ष यात्रा के बारे में प्रकाश डालिए

डॉ. अरविन्द कुमार~ मै बुंदेलखंड में रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्विद्यालय झाँसी का संस्थापक सदस्य हूं। साइंस एंड इंजीनियरिंग  क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए भारत सरकार ने पद्मश्री से सम्म्मानित किया। मेरा शोध बेसिकली रेपसीड सरसों पर था। उसी लिए मुझे यह सम्मान भारत सरकार ने दिया है।

प्रश्न~ आपका परिवार मूल रूप से कहां का रहने वाला है।

डॉ. अरविन्द कुमार~ मेरा परिवार मूल रूप से रूहेलखंड मंडल स्थित पीलीभीत निवासी हूं।  लेकिन मेरा जन्म 04 जुलाई 1952 को हरिद्वार उत्तराखंड में हुआ था। मैने पीएचडी (सस्यविज्ञान) 1975 में की। एम.एससी कृषि (सस्यविज्ञान), एम. फिल मे गोल्ड मेडल हासिल किया।
          

प्रश्न~ रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय का कृषि क्षेत्र में आपका क्या विशेष योगदान है ?

डॉ. अरविंद कुमार~ विश्वविद्यालय को भारत की संसद द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में स्थापित किया गया है। साल 2014 से 2022 तक मै विश्वविद्यालय में कुलपति पद पर रहा।  हैं। प्रथम कुलपति रहते हुए अपने 08 साल के कार्यकाल में विश्वविद्यालय ने 300 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया। फिर अत्याधुनिक व पर्यावरण अनुकूल शैक्षणिक भवन, प्रशासनिक भवन, तकनीकी लैब, विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित कृषि, बागवानी और वानिकी कॉलेज का निर्माण किया गया। भारत सरकार ने भी इस प्रयास की तारीफ की थी। विश्वद्यालय ने कम समय में विश्व स्तर पर पहचान बनाई रानी लक्ष्मीबाई कृषि विश्वविद्यालय का उद्घाटन प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने 29 अगस्त 2020 को योगी आदित्यनाथ और कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की उपस्थति में किया था। 

प्रश्न~ रानी लक्ष्मीबाई कृषि विश्वविद्यालय से महाविद्यालय भी जुड़े हैं ?

डॉ. अरविंद कुमार~ झांसी में ही दतिया परिसर में पशु चिकित्सा, पशु विज्ञान व मत्स्य महाविद्यालय बनाए गए। इनका काम भी पूरा हो चूका है। केंद्रीय कृषि मंत्री एन.एस. तोमर ने उनका शिलान्यास किया। इसका श्रेय मोदी सरकार नीतियों को है। कृषि अनुसंधान शिक्षा और विकास के अलावा कृषि साक्षरता को बढ़ावा देने एवं किसानों और शोधकर्ताओं के बीच साझेदारी स्थापित करने का काम मेरा था, जिसे मैंने पूरी लगन और मेहनत से किया।
              

प्रश्न~  आपने किसानों की आमदनी बढ़ाने में किस तरह अपना योगदान दिया ?

डॉ. अरविंद कुमार~  डीडीजी (कृषि शिक्षा), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के रूप में 06 वर्ष के मेरे नेतृत्व में भारत में उच्च कृषि शिक्षा में सुधार के लिए कई नीतियां विकसित हुई । जैसे विश्व बैंक-सहायता प्राप्त राष्ट्रीय कृषि उच्च शिक्षा परियोजना, छात्र ग्रामीण उद्यमिता और जागरूकता विकास योजना आदि। भारत में उच्च कृषि शिक्षा के लिए पहली बार नीति बनी। देश में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए नीति विकसित की गई। कृषि विश्वविद्यालयों, डीयू और सीयू सहित राष्ट्रीय कृषि शिक्षा प्रणाली (एनएआरएस) का प्रभावी समन्वय और वित्त पोषण, शिक्षा नीति व विकास जैसे की छात्र सुविधाओं का आधुनिकीकरण किया गया।
                

प्रश्न~ आपकी कृषि क्षेत्र में अन्य क्या उपलब्धियां हैं ?

डॉ. अरविंद कुमार~ आईसीएआर- डीआरएमआर भरतपुर निदेशक  (08 वर्ष) मेरी अगुवाई मे पहली CMS आधारित हाइब्रिड NRCHB506 प्रजाति का विकास हुआ। चार उच्च उपज वाली तोरिया-सरसों की किस्मों का विकास किया गया। मैंने ब्रासिका पर 22 अनुसंधान और 12 सत्यापन केंद्रों पर तकनीकी कार्यक्रम की निगरानी की है।  परिणामस्वरूप तिलहन ब्रासिका  53 किस्मों की पहचान जारी की गई। मेरे प्रयासों से तोरिया-सरसों का उत्पादन उस समय के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इसके अलावा रोग प्रतिरोधी प्रजाति, NRCDR-515 और 35 तोरिया सरसों के जर्मप्लाज्म पंजीकृत कराए, अन्य भी बहुत सी उपलब्धियां हैं।

प्रश्न~ यूपी में किसानों की आय दोगुनी करने के लिए आपने क्या काम किया ?

डॉ. अरविंद कुमार~ इस क्षेत्र में बहुत काम किया गया। मै उत्तर प्रदेश में किसानों की आमदनी दोगुनी करने वाली कोर कमेटी का अध्यक्ष था।  उस दौरान मैंने तिलहन, दलहन और बाजरा के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन केंद्र स्थापित किए। बेहतर प्रौद्योगिकियों व्यापक प्रदर्शन और कृषि क्षेत्र में नई किस्मों के आने से किसानों की आय में वृद्धि हुई है। मैंने उस कोर कमेटी का भी नेतृत्व किया, जिसने 17 व्यापक क्षेत्रों में कृषि शिक्षा का पुनर्गठन किया है । उसे देश भर में लागू किया गया है।
                  

प्रश्न~ इससे पहले आपको कौन से पुरस्कार मिले हैं ?

डॉ. अरविंद कुमार~ मुझे पदम श्री से पहले इंडियन सोसाइटी ऑफ एग्रोनॉमी द्वारा आईएसए गोल्ड मेडल और लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड मिला है। इसके अलावा निजी और सरकारी संस्थाओं से कई पुरस्कार और फैलोशिप द्वारा मान्यता मिली। भारत के सस्य भूगोल पर पुस्तक के लिए आईसीएआर द्वारा प्रतिष्ठित डॉ. राजेंद्र प्रसाद पुरस्कार (1991-93) मिला। दिल्ली रतन (2012), हरित रतन (2016) यूपी रतन (2022) मिल चुका है। इंडियन सोसाइटी ऑफ एग्रोनॉमी (1996), इंडियन सोसाइटी ऑफ ऑयलसीड रिसर्च (2000), सोसाइटी ऑफ एक्सटेंशन एजुकेशन (2009), नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चर साइंसेज (2012) के फ़ेलो भी मिले हैं। कहां तक गिनाऊं ? 
राष्ट्रीय पर्यावरण विज्ञान अकादमी (2020), कॉन्फेडरेशन ऑफ हॉर्टिकल्चर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (2021) द्वारा मानद फेलो प्रदान किया गया है।
  

प्रश्न~ आपके कृषि क्षेत्र में कितने शोध पत्र प्रकाशित किए गए ?

डॉ. अरविंद कुमार~ मेरे नेतृत्व मे 22 एम.एस.सी (कृषि) व 09 पीएचडी सस्य विज्ञान शोध ग्रन्थों का निर्देशन हुआ। जबकि 160 शोध पत्र, 85 मौलिक पत्र व पुस्तक,अध्याय, बुलेटिन आदि 56 शोध ग्रन्थों का प्रकाशन किया गया। इसके अलावा 200 राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय गोष्ठियों में प्रस्तुति की गयी।
            
मेरा कृषि विज्ञान व प्रौद्योगिकी शिक्षा क्षेत्र में पूरा कार्यकाल 40 वर्ष से अधिक रहा। लगभग 27 वर्ष (शिक्षण, शोध व प्रसार शिक्षा),  प्राध्यापक व (तिलहनी फसलों का समन्वयन) पद पर गोविन्द बल्लभ पंत कृषि व प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पन्तनगर में काम किया। तीन वर्ष संयुक्त निदेशक (प्रसार), उत्तराखण्ड अलग राज्य बनने के पश्चात वहां भी विभिन्न जिलों में कृषि विज्ञान केन्द्रों की स्थापना कराई। इसके अलावा निदेशक (रेपसीड मस्टर्ड), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, राष्ट्रीय सरसों अनुसंधान केन्द्र, भरतपुर पर लगभग 08 वर्ष, उप महानिदेशक (कृषि शिक्षा) लगभग 06 वर्ष, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली, उप महानिदेशक (मत्स्य) 05 माह, इंडियन सोसायटी आफ एग्रोनानी (2011-12), इंडियन सोसायटी आफ ऑयल सीडस रिसर्च (2016-17), सोसायटी आफ रेपसीड-मस्टर्ड अद्यतन अध्यक्ष रहा।  रानी लक्ष्मीबाई केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झॉसी में कुलपति पद पर 08 वर्ष मेरा कार्यकाल था।

प्रश्न~ आपके परिवार में कौन कौन हैं ?

डॉ. अरविन्द कुमार ~  परिवार में मेरी पत्नी सर्वेश सक्सेना,  एमए (अंग्रेजी), पुत्री डॉ. पूजा है। डॉ. पूजा उपनिदेशक कृषि विभाग में है। उनके पति सीनियर गन्ना निरीक्षक  पद पर हैं। दूसरी पुत्री डॉ. सोनल व उनके पति डॉ. समीर श्रीवास्तव आईवीआरआई बरेली में वरिष्ठ वैज्ञानिक पद पर हैं। मेरे बेटे सीनियर रीजनल मैनेजर और पुत्र वधु अनुपमा रैंडस्टैड में ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट मे सीनियर पोस्ट पर कार्यरत हैं। छोटे पुत्र डॉ. अभिनव कुमार ने कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में आईआईटी बीएचयू से पीएचडी की उपाधि ली है।

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Author: Telegram Hindi