



मनमाना कमीशन, नियम विरुद्ध कार्य और निगम को वित्तीय क्षति पहुंचाने समेत कई गंभीर आरोप
विशेष संवाददाता
बरेली , टेलीग्रामहिन्दी। अधिशासी अभियंता (सिविल) नगर निगम बरेली दिलीप कुमार शुक्ला को विभिन्न गड़बड़ियों के आरोप में शासन ने निलंबित कर दिया है। शासन ने उन्हें निदेशक स्थानीय निकाय मुख्यालय से संबद्ध कर विस्तृत जांच अपर आयुक्त (प्रशासन) वाराणसी को सौंपी है।
गुरुवार शाम निलंबन आदेश की प्रति नगर निगम बरेली पहुंची। प्रमुख सचिव अमृत अभिजात द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि वाराणसी नगर निगम में तैनाती के दौरान कई आरोप लगे हैं जिसकी जांच नगर आयुक्त वाराणसी द्वारा की गई जिसमें बड़ी वित्तीय गड़बड़ियां होने के प्रमाण मिले हैं। शुक्ला पर विभागीय नियमों के विपरीत कार्य करने लगा आरोप भी सही पाया गया है।

वाराणसी आरोपित बरेली में दंडित
अधिशासी अभियंता दिलीप कुमार बरेली में मुख्य अभियंता का भी कार्यभार देख रहे थे। यहां भी उन पर कमीशनखोरी समेत काफी शिकायतें लंबित हैं। एक ठेकेदार पत्नी से अश्लील बातें करने का भी आरोप लगा है। श्री शुक्ला पर बरेली में भी करोड़ों रुपए की निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी, फाइलें दबाने और मनमाना कमीशन लेने के बावजूद भुगतान न करना समेत कई गंभीर आरोप है। इसलिए यह सब श्री शुक्ला पर भारी पड़ गया है।
प्रमुख सचिव ने क्या कहा है निलंबन आदेश में
प्रमुख सचिव नगर विकास अमृत अभिजात द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि नगर आयुक्त, नगर निगम, वाराणसी के पत्रांक 1/209/केन्द्रीय /2023-24, दिनांक- 26-04-2023 के परीक्षणोंपरान्त यह पाया गया कि नगर निगम, वाराणसी में तैनाती अवधि के दौरान निर्माण विभाग से सम्बन्धित कतिपय प्रकरणों में भुगतान न होने पर विभिन्न फर्म/ठेकेदार द्वारा वर्ष 2018 में आर्बिटेशन वाद दाखिल किये गये, जिसमें प्रतिवादी संख्या-04 द्वारा प्रभावी पैरवी के अभाव में निगम / सरकार के विरूद्ध प्रतिकूल आदेश निर्गत हुये है, जिसके अनुपालन में निगम / सरकार निगम/सरकार को बड़ी वित्तीय क्षति आदि अनियमितता के लिये दिलीप कुमार शुक्ला, तत्कालीन अधिशासी अभियन्ता (सिविल), नगर निगम, वाराणसी सम्प्रति नगर निगम, बरेली प्रथमदृष्ट्या दोषी पाये गये हैं। 2- उक्त कृत्य शासकीय कार्यों के निर्वहन में कदाचार तथा उच्चाधिकारियों द्वारा दिये गये आदेशों की अवहेलना है, जिसके लिये दिलीप कुमार शुक्ला, तत्कालीन अधिशासी अभियन्ता (सिविल), नगर निगम, वाराणसी सम्प्रति नगर निगम, बरेली के विरूद्ध अनुशासनिक कार्यवाही प्रस्तावित (Contemplated) है। उत्तर प्रदेश पालिका (केन्द्रीयित) सेवा नियमावली, 1966 के नियम- 37 सपठित उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-4 (1) के अन्तर्गत एतद्द्वारा तात्कालिक प्रभाव से निलम्बित करते हुए उनके विरूद्ध उक्त नियमावली के नियम-7 अन्तर्गत अनुशासनिक कार्यवाही संस्थित करते हुए प्रकरण की जांच हेतु अपर आयुक्त (प्रशासन), वाराणसी मण्डल वाराणसी को जांच अधिकारी नामित किया है।
आदेश में कहा है कि मूल निलम्बन अवधि में दिलीप कुमार शुक्ला को वित्तीय नियम संग्रह, खण्ड-2, भाग से 4 नियम 53 के प्राविधानों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ते की धनराशि अर्द्धवेतन पर देय अवकाश वेतन की राशि के बराबर देय होगी तथा उन्हें जीवन निर्वाह भत्ते की धनराशि पर मंहगाई भत्ता, यदि ऐसे अवकाश वेतन पर देय है, भी अनुमन्य होगा, किन्तु ऐसे अधिकारी को जीवन निर्वाह के साथ कोई महंगाई भत्ता देय नहीं होगा, जिन्हें निलम्बन से पूर्व प्राप्त वेतन के साथ मंहगाई भत्ता अथवा मंहगाई भत्ता का उपान्तिक समायोजन प्राप्त नहीं था, निलम्बन दिनांक को प्राप्त वेतन आधार पर अन्य प्रतिकर भत्ते भी निलम्बन की अवधि में इस शर्त पर देय होंगे, जब इसका समाधान हो जाये कि उनके द्वारा उस मद में व्यय वास्तव में किया जा रहा है, जिसके लिये उक्त प्रतिकर भत्ते अनुमन्य है।
प्रमुख सचिव ने आदेश में कहा है कि उपर्युक्त प्रस्तर-3 में उल्लिखित मदों का भुगतान तभी किया जायेगा जबकि श्री शुक्ला इस आशय का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करें कि वह किसी अन्य सेवायोजन, व्यापार, वृत्ति व्यवसाय में नहीं लगे हैं।

शुक्ला नगर निकाय निदेशक लखनऊ कार्यालय से सम्बद्ध
आदेश में कहा गया है कि श्री शुक्ला, तत्कालीन अधिशासी अभियन्ता (सिविल), नगर निगम, वाराणसी सम्प्रति नगर निगम, बरेली निलम्बन अवधि में निदेशक, नगर निकाय लखनऊ कार्यालय से सम्बद्ध रहेंगे।


