एक सौ दस साल के स्वामी हीरानंद को जुनून है कलम से पौधे तैयार करने का

लाख से  ज्यादा पौधे तैयार किये है “कलम”से  

विशेष संवाददाता

हरिद्वार , टेलीग्रामहिन्दी । उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़  जिले के ठाकुर हरिश्चंद्र सिंह  सेंगर पिछले 75 वर्ष से हरिद्वार के श्री चित्रकूट अखंड आश्रम में  रह रहे हैं। 75 वर्ष के बैरागी अब स्वामी हीरानंद के नाम से जाने जाते हैं। इस वक्त उनकी उम्र 110 साल है। 5 फिट 9 इंच लंबे स्वामी हीरानंद की कमर झुक गई है लेकिन काम का जज्बा अभी से सिथिल नहीं हुआ है। उन्होंने  जीवन में  लाख से ज्यादा पौधे तैयार किये है “कलम” से ठाकुर हरिश्चंद्र सिंह  सेंगर   प्रतापगढ़ जिले के थाना कुड्डा में घुड़सवार थे। थाने  की  सरकारी सूचनाओं का आदान-प्रदान उनकी ड्यूटी में शामिल था। जो पुलिस वाले घोड़ा चलाना नहीं जानते थे ,उन्हें  घोड़ा चलाना भी सिखाते थे।

स्वामी हीरानंद

थाना कुडडा के  ही  ग्राम सावरी के रहने वाले हरिश्चंद्र सिंह बताते हैं कि जिस दिन महात्मा गांधी की हत्या हुई थी ,उसी दिन वह चुपचाप नौकरी छोड़ कर सीधे हरिद्वार आये, हरिद्वार में  उनके एक परिचित स्वामी उमाकांत जी रहा करते थे। कई दिन तलाश करते करते एक दिन स्वामी उमाकांत जी से मुलाकात हो गई, उमाकांत जी उन्हें हरिद्वार में ही सरोवर मा में रह रहे देश के प्रख्यात संत राजा महाराज बताते हैं कि स्वामी दयानंद महाराज विलक्षण प्रतिभा के धनी थे , साक्षात भगवान स्वरूप थे उनकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है।

स्वामी दयानंद महाराज

स्वामी दयानंद महाराज ने ठाकुर हरिश्चंद्र सिंह को अपना शिष्य बनाया गुरु  मंत्र भी दिया।  स्वामी दयानंद महाराज ने एक दिन  स्वामी हीरानंद से कहा कि तुम पेड़ लगाने के शौक़ीन हो मय जड़ के  पौधा तो कोई भी लगा सकता है लेकिन स्वामी हीरानंद हर पेड़ की कलम बनाकर के पौधा तैयार करो तो यह बड़ी बात  होगी । उस दिन से स्वामी हीरानंद पौधों की कलम बनाने में ही जुट  गए और इसमें उन्होंने बहुत बड़े-बड़े शोध किए। कुछ पौधे ऐसे होते हैं जिनकी तो केवल लकड़ी लगा देने से पौध तैयार हो जाता है। लेकिन कुछ पेड़ ऐसे भी हैं जिनकी कलम से पौधा तैयार नहीं होता है। वह गर्व से कहते हैं कि उन्होंने पिछले 70  वर्षों से जो भी पौधे बगीचे में लगाए हैं या जिनको हमने पौधे दिए हैं “कलम” का पौधा ना लगा हो।
स्वामी हीरानंद का कहना है कि पेड़ लगाने का शौक तो  उन्हें बचपन से है।  उन्होंने अपने गांव में भी जवानी के समय सैकड़ो की संख्या में पेड़ लगाए हैं।  लेकिन अभी भी वह है, कलम बनाने की विधा लोगों को बताते रहते हैं। समय समय पर  खुरपी चलती रहती है।  आजकल भीषण बारिश के चलते खुरपी नहीं चल रहीं हैं।  110 वर्ष के स्वामी हीरानंद दावा करते हैं कि उन्हें कोई बीमारी नहीं है, बुढ़ापे में जो उम्र जनित बीमारियां होती हैं वह भी उनके नजदीक से नहीं गुजर रहीं हैं। स्वामी हीरानंद कहते हैं कि अफसोस केवल की लंबाई ज्यादा होने के कमर झुक गयी है। डंडा  उनका जीवन साथी  है स्वामी
हीरानंद चित्रकूट अखंड आश्रम के एक कमरे में रहते हैं। इसमें एक फकत विस्तार है, कुछ पुस्तकें हैं। एक छोटा सा झोला  है जो उनके कंधे पर रहता है इसके अलावा उनकी कोई गृहस्थी नहीं है। उनके पास आधार कार्ड तो है लेकिन बैंक में खाता नहीं है, ऐसा भी नहीं है कि लोग उन्हें दान स्वरूप नगद धनराशि नहीं देते हैं लेकिन वह आश्रम का जो दान पात्र है उसमें नियमित कुछ न कुछ  डालते रहते हैं।।

         

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Author: Telegram Hindi