



जवान फिल्म में गूंजेगा वसीम बरेलवी का शेर “उसूलों पर जहां आंच आए टकराना जरूरी है“
आर बी लाल
बरेली , टेलीग्रामहिन्दी। पिछले दिनों फिल्म निर्देशक व निर्माता सुमित अरोरा का फोन अंतरराष्ट्रीय शायर प्रोफेसर वसीम बरेलवी के फोन पर आया, कहा कि शाहरुख खान जी बात करना चाहते हैं। वसीम साहब ने कहा, कराइए। उधर से आवाज आती है- हेलो… आदाब, मैं शाहरुख खान बोल रहा हूं। इधर से आदाब, आदाब खुश रहो, तरक्की करिए। बताइए कैसे हैं आप ? बातचीत का सिलसिला लगभग 17 मिनट तक चला। बातचीत में किंग खान ने उनसे गुजारिश की कि वह अपनी आगामी फिल्म जवान में एक गाना उनका एक शेर पढ़कर शुरुआत करना चाहते हैं। सिर्फ एक शब्द का बदलाव होना है। पहले तो वसीम साहब असहज हुए लेकिन सुप्रसिद्ध अभिनेता शाहरुख की शालीनता पर वसीम जी ने शेर में एक शब्द बदलने की इजाजत दे दी।
क्या है मामला
पिछले दिनों अंतर्राष्ट्रीय शायर प्रोफेसर वसीम बरेलवी और सुप्रसिद्ध फिल्म स्टार शाहरुख खान से फोन पर करीब 17 मिनट तक संवाद हुआ लेकिन इसका खुलासा सोमवार पूर्वाहन हुआ जब शाहरुख खान ने ट्वीट कर कहा-
“उसूलों पर जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है“
तह-ए-दिल से आपका शुक्रिया वसीम बरेलवी साब जो आपने हमें अपने इस मुकम्मल शेर को इस्तेमाल करने और इसके साथ थोड़ी गुस्ताखी करने की इजाज़त दी।
गाने के बोल हैं इरशाद कामिल साब के, और संगीत दिया है अनिरुद्ध ने।
पेश है, ज़िंदा बंदा ! “
जवान फिल्म में दर्शक शाहरुख खान की आवाज में शेर सुनेंगे
प्रोफेसर वसीम बरेलवी ने एक बातचीत में बताया कि उन्होंने शाहरुख की फिल्में देखी हैं। वह एक उम्दा कलाकार हैं। अच्छे इंसान हैं। उनकी शालीनता, उनके बात करने के लहजे से उन्होंने शेर में शब्द बदलाव की इजाजत दे दी। उनका बात करने का लहजा बता रहा था वह जमीनी व्यक्ति हैं। मेरे शब्दों को उन्होंने इज्जत बख्शी है। किसी भी कलमकार को इससे ज्यादा और क्या चाहिए ?
उन्होंने बताया कि शाहरुख जी ने अपनी फिल्म जबान में मेरा पूरा शेर पड़ा है, इसकी पुष्टि भी हो गई है। करोड़ों लोगों तक यह बात पहुंच भी चुकी है। उन्होंने खुद ट्वीट भी कर दिया है। फिल्म में दर्शक मेरा ओरिजिनल शेर खुद शाहरुख साहब की आवाज में सुन सकेंगे। जवान फिल्म में फिल्माया गया एक गाने में इसका इस्तेमाल कुछ बदलाव के साथ हुआ है।

लंदन में जगजीत सिंह ने 40 साल पहले पढ़ी थी वसीम बरेलवी की गजल
उत्तर प्रदेश विधान परिषद में सदस्य (एमएलसी) रहे प्रोफेसर वसीम बरेलवी ने बताया कि मशहूर गजलकार जगजीत सिंह ने 40 साल पहले लंदन में हुए एक कार्यक्रम में उनकी ग़ज़ल पढ़ी थी। लेकिन वह अपने सुर-ताल के हिसाब से दो शब्दों में बदलाव चाहते थे। इसके लिए उन्होंने इजाजत ली थी। पहले बदलाव वाली गजल पढ़ी। इसके बाद वसीम बरेलवी का असली शेर भी पढ़ा। जगजीत सिंह ने गजल गायी थी। मैं चाहता भी यही था।
वह बेवफा निकले, उसे समझने का कोई तो सिलसिला निकले,
किताब ए माजी के पन्ने उलट के देख जरा, न जाने कौन सा पन्ना मुड़ा हुआ निकले।
जबकि वसीम साहब का असली शेर है, किताब ए माजी के औराक उलट के देख जरा, न जाने कौन सा सफहा मुड़ा हुआ निकले।
बधाई देने का सिलसिला बना रहा
वसीम साहब के प्रशंसकों को जब जानकारी मिली कि शाहरुख खान अपनी फिल्म में उनका शेर पढ़ना चाहते हैं तब मंगलवार सुबह से ही बरेली नगर में फूटा दरवाजा स्थित आवास पर लोग बधाइयां देने पहुंच गए। देर शाम तक सिलसिला जारी रहा। मिष्ठान वितरण भी हुआ वसीम साहब ने इस मौके पर उन्होंने तमाम अपने संस्मरण भी सुनाए।

