एसआरएमएस बरेली में पहला रोबोटिक सर्ज़री तकनीक से हुआ घुटना का सफल ऑपरेशन

एक दिन में लगातार तीन घुटनों प्रत्यारोपण का सफलतापूर्वक ऑपरेशन रोबोटिक सर्जरी के द्वारा हुआ

बरेली मंडल के लिये यह रोबोटिक ऑर्थोपेडिक्स सर्जरी बड़ी उपलब्धि

आर बी लाल

बरेली, टेलीग्रामहिन्दी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ऑटोमेशन ने हर क्षेत्र में क्रांति ला दी है, स्वास्थ्य सेवा भी इससे अछूता नहीं रहा। नई दवाईयों के विकास, इम्प्लांट्स, रिकॉर्ड बेहतर रूप से रखने और नए नैदानिक ​​​​उपकरणों के विकास सहित प्रौद्योगिकी ने स्वास्थ्य सेवा को कई तरह से बदला है। इन नई-नई तकनीकों के विकास ने घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी को बेहतर बनाने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

नैनीताल रोड , स्थित भोजीपुरा में एसआरएमएस इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, बरेली ने ऑर्थोपेडिक्स सर्जरी के क्षेत्र में एक सराहनीय और अभूतपूर्व मील का पत्थर साबित हुई है। यह सफलतापूर्वक रोबोटिक सर्जरी के द्वारा घुटना प्रत्यारोपण कर के की है ।
इस तरह के घुटना प्रत्यारोपण केवल बड़े मेट्रो सिटी के हॉस्पिटल में उपलब्ध हैं । यह पहली बार बरेली में एसआरएमएस इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में रोबोटिक तकनीक से घुटना का सफतलतापूर्व सर्जरी पहले प्रयास में सफल रही। यह बरेली शहर के लिए एक बड़ी उपलब्धि हैं । अब आपको मेट्रो सिटी के बड़े हॉस्पिटल में जाने की जरूरत नही पड़ेगी । यह सब अब आपके शहर में उपलब्ध होगा। यह ऐतिहासिक उपलब्धि एसआरएमएस इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में आयोजित किया गया

रोबोटिक सर्जरी ऑर्थोपेडिक्स सर्जरी के क्षेत्र में एक सराहनीय और अभूतपूर्व मील का पत्थर साबित हुई है।

इस ऐतिहासिक  रोबोटिक सर्जरी तकनीक  से घुटना का  सफतलतापूर्व सर्जरी में डॉ ध्रुव गोयल आईएमएस  ,मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटपड़गंज के ऑर्थोपेडिक्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट के कंसल्टेंट डॉ.अक्षय चंदेल की सहायता की।  अगले ही दिन, एसआरएमएस की आर्थोपेडिक सर्जनों की टीम, डॉ राहुल वर्मा , प्रोफेसर और प्रमुख, हड्डी रोग विशेषज्ञ के कुशल मार्गदर्शन में, सहायक प्रोफेसर ने लगातार तीन रोबोटिक घुटने की सर्जरी सफलतापूर्वक की।

इस ऐतिहासिक  रोबोटिकब सर्जरी तकनीकी से घुटना प्रत्यारोपण के बाद डॉ अपसेर खान ने कहा कि एसआरएमएस इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में, हमें चिकित्सा जगत में नवीनकरण , अत्याधुनिक उपचार प्रदान करने और स्वास्थ्य देखभाल मानकों को ऊंचा करने में सबसे आगे होने पर गर्व है।  हम उन सभी आर्थोपेडिक सर्जनों के प्रति अपना आभार व्यक्त करते हैं जिन्होंने लाइव प्रदर्शन में भाग लिया और इस अभूतपूर्व सर्जिकल तकनीक को प्रत्यक्ष रूप से देखा, जिससे निस्संदेह पूरे चिकित्सा समुदाय को लाभ होगा।

रोबोटिक तकनीक के उपयोग ने सर्जिकल प्रक्रिया में क्रांति ला दी है।

रोबोटिक सर्जरी के बारे में बोलते हुए, डॉ ध्रुव ने कहा, “रोबोटिक तकनीक के उपयोग ने सर्जिकल प्रक्रिया में क्रांति ला दी है, जिससे रोगियों के लिए अधिक सटीकता, बेहतर परिणाम और त्वरित रिकवरी समय सुनिश्चित हुआ है। रोबोटिक सिस्टम सहायता से, हमारे सर्जन अद्वितीय सटीकता प्राप्त करने और प्रदर्शन करने में सक्षम है।  सर्जरी कुशलतापूर्वक हम एसआरएमएस इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज,बरेली की पूरी ऑर्थोपेडिक टीम को उनकी उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई देते हैं!  इस रोबोटिक सहायता ने घुटने के प्रत्यारोपण की आवश्यकता वाले रोगियों के लिए नई संभावनाएं खोल दी हैं।

ऐसे होती है रोबोटिक सर्जरी

इस रोबोटिक सर्जरी की तकनीक में डॉक्टर के सहायक के रुप में काम करती है रोबोटनुमा मशीन, जो कम्प्यूटर कमांड के जरिए चलती है। डॉक्टर अपने हाथ में कंम्प्यूटर से जुड़ी रोबोटिक डिवाइस को पहन कर सर्जरी करते है।रोबोट में कैमरा लगा होता है जो सेंसर घुटने के सारे गतिविधियों पर नज़र रखता है और उसकी इमेज तैयार करता है। इसके बाद रोबोट डॉक्टर को ऑपरेशन का सारा प्लान बताते है कि हड्डी कितनी और किस जगह से काटनी है।

इस अवसर पर मौजूद रहे एसआरएमएस इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के चेयरमैन देव मूर्ति , आदित्य मूर्ति, डॉ ध्रुव गोयल ,डॉ अपसेर खान, डॉ.अक्षय चंदेल,एसआरएमएस की आर्थोपेडिक सर्जनों की टीम, डॉ राहुल वर्मा , प्रोफेसर और प्रमुख  हड्डी रोग विशेषज्ञ आदि लोग उपस्थित रहे

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Author: Telegram Hindi