



बरेली, टेलीग्राम हिंदी। जिला अस्पताल में जिंदा लोगों की ही कोई परवाह नहीं करता, लिहाजा मुर्दों की परवाह का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। मोर्चरी के महीनों से खराब पड़े डीप फ्रीजर अफसरों की संवेदनशून्यता की यही कहानी कह रहे हैं। गर्मी से शव खराब होने की वजह से इतनी तेज दुर्गंध उठती है कि आसपास के वार्डों में मरीजों का रहना मुश्किल हो जाता है लेकिन फिर भी अफसर ध्यान देने को तैयार नहीं हैं।
केंद्र प्रभारी के मुताबिक कई बार उच्चाधिकारियों से नए फ्रीजर उपलब्ध कराने या फिर खराब पड़े डीप फ्रीजरों की मरम्मत कराने की मांग की जा चुकी है लेकिन अब तक इस पर कोई गौर नहीं किया गया।
विभागीय कर्मचारियों के अनुसार जिला अस्पताल की मोर्चरी में शव रखने के लिए तीन डीप फ्रीजर हैं जिनमें से दो कई महीने से खराब पड़े हैं। ऐसे में यहां एक दिन भी शव रखने में काफी दिक्कत हो रही हैं। एक दिन बाद ही शव से दुर्गंध आने लगती है।
मोर्चरी या पोस्टमार्टम घर में अज्ञात शवों की पहचान के लिए उन्हें 72 घंटे रखना पड़ता है। मोर्चरी में रखे दोनों डीप फ्रीजर खराब होने की वजह से शवों को चबूतरों पर रखा जाता है। भीषण गर्मी में 12 घंटे बाद ही शव से बदबू आने लगती है। 72 घंटे तक पड़े-पड़े शव सड़ने लगते हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत ुन शवों को रखने में आ रही है जो नदी या तालाब में डूबने से मौत के बाद आते हैं।
डीप फ्रीजर की मरम्मत कराने के लिए अधीनस्थों को आदेश दिया है। इसके साथ एक नया फ्रीजर मंगाने का भी प्रस्ताव तैयार कराया गया है। जल्द ही समस्या दूर हो जाएगी।
डॉ. अलका शर्मा, एडीएसआईसी जिला अस्पताल


