कथा समाप्त नहीं अपितु विश्राम लेती है-आचार्य मुकेश

बरेली, टेलीग्राम हिंदी।पुराना शहर मीरा पैठ स्थित ठाकुर जी महाराज मंदिर पर श्रीमद्भागवत कथा के आखिरी दिन रविवार  को  व्यास मंचासीन आचार्य मुकेश मिश्रा  ने सुदामा चरित्र का सुंदर वर्णन किया। उन्हाेंने कहा कि सुदामा कौन हैं। इस बात पर विचार करना चाहिए और सुदामा के बारे में जानना ही कथा कहलाती है। सुदामा वह नहीं होता जो सिर्फ निर्धन ही हो, अपितु वह भी होता है जिसने जीवन में अच्छा दाम कमाया हो। शुकदेव पूजन के साथ कथा का विश्राम हुआ। देखा जाए तो कथा विश्राम का अर्थ समापन नहीं होता, क्योंकि कथा केवल प्रारंभ होती है, विराम नहीं।विश्राम से अर्थ होता है, कथा सुनकर हमारे हृदय में चल रही उद्देगनाओं, क्रोध, मोह, ईर्ष्या से विश्राम से मिलकर परम शांत स्वरूप, भगवान का हृदय में स्थापित हो जाना ही कथा विश्राम कहलाता है। शुकदेव ने अंतिम उपदेश भी यही दिया, जो भगवान को बजते हैं उन्हें मृत्यु से भय नहीं रहता अपितु मृत्यु भी उस जीवात्मा का स्वागत के लिए तत्पर रहती है कथा के दौरान आचार्य ने भगवान श्री कृष्ण की 16108 विवाह नव योगेश्वर संवाद, मुक्ति स्कंध आदि की कथाओं का विस्तार पूर्वक वर्णन किया। भक्तों ने नम आंखों से कथा व्यास को विदा किया। इससे पूर्व मुख्य यजमान संजू गुप्ता ने व्यास मंच की पूजा विधि विधान से की। धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो, प्राणियों में सद्भावना हो, हिंदू राष्ट्र स्थापित हो’ इस नारे के साथ भागवत विश्राम की गई अंत में झूमते- गाते, भाव- विभोर होते हुए  फूलों की होली खेली गई। इस मौके पर रामेन्द्र प्रसाद गुप्ता मंदिर ट्रस्ट के सचिव गिरजा किशोर गुप्ता, कमलेश गुप्ता, संजू गुप्ता, पंकज गुप्ता, गौरव गुप्ता, ममता गुप्ता, मुरारी गुप्ता, संजीव गुप्ता, सुरेश गुप्ता,  रजत मिश्रा सहित भारी संख्या में सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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Author: Telegram Hindi