अविद्या का विनाश ही पूतना वध-आचार्य मुकेश

बरेली, टेलीग्राम हिंदी। पुराना शहर मीरा पैठ स्थिति ठाकुर जी महाराज मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन ब्यास मंचासीन कथा प्रवक्ता आचार्य मुकेश मिश्रा ने कहा जीव की अविद्या व्रती ( भगनी अज्ञान ) का विनाश ही पूतना वध है। पूतना बन ठन के आयी तो परंतु उसे न अपने रूप का ही ज्ञान है ना ही ब्रह्मस्वरूप श्री कृष्णा के स्वरूप का ज्ञान है फिर भी श्री कृष्णा के सम्मुख पहुँच गयी और भगवान श्री कृष्ण ने पूतना की मुक्ति कर दी। अतः इसी प्रकार अविद्या यानी अज्ञान ठाकुर जी के सानिध्य में नष्ट हो जाता है। आचार्य ने कथा के दौरान लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि अघासुर, वकासुर का विनाश कर प्रभु ने ब्रजवासियों को माखन चोरी एवं ओखल बंधन के माध्यम से परमानंद की अनुभूति करवायी।

भक्ति भाव सेओतप्रोत व्रजवासी कृष्ण के समर्पण भाव को प्राप्त कर अनन्यभाव से अपना माना यही भाव ठाकुर जी को पसंद आ गया और स्वयं ब्रह्ममय बन गए। क़ालीया मर्दन एवं चीर हरण की लीलाओं का विशद विवेचन किया। गिरिराज पूजन कर व्रजवाशियों ने कृष्ण की ही पूजा को और इंद्र के मान का मर्दन किया। अंत में गिरिराज को छप्पन भोग लगाया गया। संगीतकार हरिशंकर शर्मा, विमल पाराशरी भजन गाकर भक्तों को भावविभोर कर दिया। कथा के मुख्य यजमान राजीव गुप्ता मंच की पूजा विधिवत की।इस मौके पर मंदिर ट्रस्ट के सचिव गिरजा किशोर गुप्ता, शशि गुप्ता, कमलेश गुप्ता, सुनील शर्मा, संजू गुप्ता, पंकज गुप्ता, गौरव गुप्ता, ममता गुप्ता, मुरारी गुप्ता, संजीव गुप्ता, सुरेश गुप्ता, उदित मिश्रा रजत मिश्रा सहित भारी संख्या में सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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Author: Telegram Hindi