आइवीआरआई ने मनाया विश्व पर्यावरण दिवस

वैज्ञानिकों, छात्रों एवं अधिकारियों द्वारा पर्यावरण को बचाने की ली गयी प्रतिज्ञा

बरेली, टेलीग्राम हिंदी। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, इज्जतनगर में विश्व पर्यावरण दिवस पर पर कई कार्यक्रमों के माध्यम से पर्यावरण बचाने का संकल्प लिया गया इसके लिए संस्थान में कई कार्यक्रम आयोजित किये गये जिनमें पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता, आइडिएशन हैकाथॉन, प्लेकार्ड प्रतियोगिता, साइकिल रेस, प्लांटेशन ड्राइव, मिशन लाइफ रैली आदि थे। इसके अतिरिक्त संस्थान के वैज्ञानिकों, छात्रों एवं अधिकारियों द्वारा पर्यावरण को बचाने की प्रतिज्ञा भी ली गयी। इस अवसर पर छात्रों द्वारा पर्यावरण सुरक्षा पर लघु नाटिका तथा वाइल्डलाइफ सुरक्षा पे माईम आदि प्रस्तुत किये गए ।

पर्यावरण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए संस्थान की संयुक्त निदेशक, प्रसार शिक्षा डा. रूपसी तिवारी ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का उद्देश्य पर्यावरण का संरक्षण करना है, यानी की पर्यावरण में उपस्थित, नदी, तालाब, जंगल, पशु-पक्षी, पहाड़ आदि का संरक्षण करना है, ओर ग्लोबल वार्मिग और जलवायु परिवर्तन, तथा प्रदूषण के खतरों के प्रति लोगों को जागरूक करना है, ताकि हर इंसान पर्यावरण के महत्व को समझ सकें और पर्यावरण को बचाने का काम करें। उन्होंने आव्हान किया कि हमें पर्यावरण को बचाने तथा उससे संरक्षित करने के प्रयास करने होंगे। हमें आवश्यकतानुसार संसाधन अपनाने होंगे तथा पर्यावरण को इकोफ्रेंडली बनाने के प्रयास करने होंगे। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट (ई-वेस्ट) कचरे के बारे में बताते हुए कहा कि हम अपने घरों और उद्योगों में जिन इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों को इस्तेमाल के बाद फेंक देते है, वहीं बेकार फेंका हुआ कचरा इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट (ई-वेस्ट) कहलाता है। इनसे समस्या तब उत्पन्न होती है जब इस कचरे का उचित तरीके से कलेक्शन नहीं किया जाता। साथ ही इनके गैर-वैज्ञानिक तरीके से निपटान किए जाने की वजह से पानी, मिट्टी और हवा जहरीले होते जा रहे हैं। जो स्वास्थ्य के लिए भी समस्या बनते जा रहे हैं। ई-वेस्ट के माध्यम कम्पयूटर, डीवीडी, सीडी तथा हमारे पुराने मोबाइल फोन हैं। उन्होंने छात्रों को पर्यावरण को बचाने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा क्लाइमेंट क्लब बनाकर पर्यावरण के संरक्षण की बात कही। उन्होंने जल संरक्षण के बारे में बताते हुए कहा कि पृथ्वी में 3 प्रतिशत पानी में से 1.5 प्रतिशत पानी ही पीने योग्य है अतः हमें जल को बचाने के उपायों को अपनाना होगा तथा वेस्ट वाटर का उपयोग करना होगा।

 डॉ.  तिवारी ने छात्रों को मोबाइल पर संदेश भेजने की जगह वार्तालाप करने की सलाह दी।  उन्होने कहा की हम जो रोज गुड मॉर्निंग, गुड नाइट जेसे मैसेज को भेजते हैं ये भी पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं। उन्होने कहा कि ये मैसेज सर्वर और डाटा केंद्र में एकत्र हो रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ एक थैंक यू मेसेज कम करने से देश में 16 हजार टन कार्बन उत्सर्जन प्रति वर्ष कम किया जा सकता हैंI अत : हमें इन मैसेज के अधिकाधिक प्रयोग से बचना होगा तथा वार्तालाप को अपनाना होगा  जिससे हमारे बीच आपसी संवाद तथा ज्ञान का आदान प्रदान हो सके।

विभागाध्यक्ष प्रसार शिक्षा डा. महेश चन्द्र ने बताया कि प्लास्टिक के अधिकाधिक उपयोग से हमारी धरती को काफी नुकसान हो रहा है अत हमें प्लास्टिक के प्रयोग को कम करने के साथ-साथ उसका पुनउपयोग रिसाइकिलिंग तथा रिओरियंट को अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि आप सभी संकल्प ले की आज के बाद प्लास्टिक का यूज करना कम कर देगे, यूज करेगे तो सिर्फ़ रिसाइकिल प्लास्टिक को क्योंकि आज के समय बहुत सारे प्लास्टिक का उत्पाद रोजाना होता हैं. जिसमें से आधे को तो सिर्फ एक बार यूज करने के लिए डिजाइन किया जाता हैं. जो यूज होने के बाद नदी, तालाबों में फेका हुवा मिलता हैं और जल प्रदूषित करता हैं, या फिर जगह-जगह जला हुवा जो वायु प्रदूषित करता हैं। उन्होंने पश्चिमी देशों का उदाहरण देते हुए कहा पश्चिमी देशों के लोग पर्यावरण को बचाने के लिए कई तरह के उपाय कर रहे हैं जिनमें साइकिल का अधिक से अधिक उपयोग, आफिस जाने के लिए एक से अधिक लोगों द्वारा एक ही वाहन का प्रयोग तथा एयर कंडीशनर के उपयोग का कम प्रयोग कर रहे हैं। एयर कंडीशनर का अधिक उपयोग हमारे स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने पर्यावरण को संतुलित बनाने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने पर बल दिया।

इस अवसर पर विभागाध्यक्ष, दैहिकी एवं जलवायुकी विभाग डा. ज्ञानेन्द्र सिंह ने बताया कि हमारे पर्यावरण को प्रदूषित करने में कार्बनडाईआक्साइड तथा मिथेन गेसो का भी महत्वपूर्ण भूमिका है अतः इनके अधिकाधिक प्रयोग से हमें बचना होगा पर्यावरण को सुरक्षित बनाने  लिए हमें इन गैसों को कम करने के प्रयास करने होंगे तथा पर्यावरण को बचाने के लिए ग्रीन हाउस गैसों को अपनाने पर बल दिया। डॉ  सिंह ने ओद्योगिक घरानों से निकलने वाले जहरीले धुओं तथा गैसों को कर्म करने तथा पर्यावरण को संरक्षित रखने हेतु पेट्रोलियम उत्पादों को कम प्रयोग में लाने की सलाह दी।

 छात्र कल्याण अधिकारी डा. एस. के साहा ने विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों के बारे में कहा कि इस अवसर पर छात्रों के लिए फोटोग्राफी प्रतियोगिता, पेंटिंग प्रतियोगिता, क्विज प्रतियोगिता, छात्रों द्वारा पर्यावरण दिवस पर जागरूकता रैली, साइकिल रैली, तथा पौधारोपणआदि शामिल हैं।

कार्यक्रम का संचालन डा. श्रुति द्वारा किया गया जबकि पर्यावरण दिवस पर आयोजित प्रतियोगिताओं को कराने में डा. अयोन तरफदार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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Author: Telegram Hindi