



विशप मंडल इंटर कॉलेज और आंवला में हुई थी जनसभा
बरेली, टेलीग्राम हिंदी। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की आज (21 मई 2023) को 79 वीं जयंती मनाई जा रही है। कांग्रेसियों के साथ हर देश प्रेमी जिसको संचार और कंप्यूटर क्रांति के जनक राजीव गांधी के जाने का दुख है। देश के युवाओं को 18 वर्ष की आयु में मतदान का अधिकार देने वाले पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी हत्या से एक दिन पहले 20 मई 1991 को बरेली आए थे। वे 10 वीं लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए शहर के विशप मंडल इंटर कॉलेज में कांग्रेस प्रत्याशी अकबर अहमद डंपी के समर्थन में जनसभा को संबोधित किया। इस दिन उन्होंने आंवला लोकसभा क्षेत्र में भी कांग्रेस प्रत्याशी रमा देवी के समर्थन में जनसभा की। इस दौरान उन्होंने बरेली वासियों से जल्द दोबारा लौट कर आने का वादा किया था।
अगले दिन तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में 21 मई 1991 को जनसभा से पहले एक महिला ने मानव बम बनकर राजीव गांधी की हत्या कर दी थी।
गले में पड़ा था मेहरून रंग का अंगोछा, पहने थे सफेद कुर्ता
पूर्व पीएम राजीव गांधी हत्या से एक दिन पहले बरेली में सफेद रंग कुर्ता पायजामा पहनकर आए थे। इसके साथ ही उनके गले में मेहरून रंग का अंगोछा पड़ा था। राजीव गांधी के माथे पर तिलक लगा था। उनकी बरेली और आंवला की अंतिम जनसभा में बेतहाशा भीड़ थी उनके जाने का दर्द आज भी बरेली वासियों की आंखे नम कर जाता है।

“1991 में लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए बरेली पहुंचे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ गुजरे पलों को याद कर आज भी वरिष्ठ पत्रकार राकेश आर्य रोमांचित हो जाते हैं लेकिन जैसे ही अगले दिन राजीव गांधी की तमिलनाडु में जनसभा से पहले मानव बम से हत्या की खबर मिलती है वह बेहद शॉक्ड हो जाते हैं। वरिष्ठ पत्रकार राकेश आर्य बताते हैं कि एक दिन पहले ही राजीव गांधी बरेली पहुंचे थे। उनके साथ मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी और कांग्रेस प्रत्याशी अकबर अहमद डंपी मौजूद थे। राजीव गांधी पत्रकारों को कितनी सहजता से लेते थे इसे इस बात से समझा जा सकता है कि प्रत्याशी के समर्थन में पुलिस लाइन बरेली से जिप्सी में बैठकर मंच पर पहुंचे। हेलीकॉप्टर से पुलिस लाइन पहुंचे राजीव गांधी ने वरिष्ठ पत्रकार राकेश आर्य और आरबी लाल प्रमुख नेताओं के साथ जिप्सी में बैठा लिया था।
राकेश कुमार आर्य, वरिष्ठ पत्रकार बरेली
वरिष्ठ पत्रकार राकेश आर्य बताते हैं कि राजीव गांधी पत्रकारों के साथ सहज होने के साथ-साथ नेचुरल लीडर भी थे और उन्होंने उनके साथ उस समय के राजनीतिक परिवेश को लेकर चर्चा भी की थी आजकल नेता लोग मीडिया से दूर रहते हैं। पब्लिक के साथ मिलकर नहीं चलते मीडिया और पब्लिक को कई सुरक्षा पैनलों से गुजरना पड़ता है लेकिन वह इस बात से बेहद आश्चर्यचकित थे कि राजीव गांधी पब्लिक के बीच लोगों से हाथ मिलाकर साथ मिलकर चल रहे थे। वहीं उन्होंने बताया कि राजीव गांधी के पास देश को विकसित करने के लिए अच्छी दूरगामी सोच थी उनमें भारत को आगे ले जाने की कैपेसिटी और स्पष्ट विजन था।”
