



- राष्ट्रपति बनीं तो रचेंगी इतिहास द्रौपदी मुर्मू
नई दिल्ली। एनडीए गठबंधन की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू ने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। द्रौपदी मुर्मू की ओर से 4 सेटों में नामांकन दाखिल किया गया। पहले सेट में पीएम नरेंद्र मोदी खुद उनके प्रस्ताव बने। इसके अलावा अमित शाह, राजनाथ सिंह समेत भाजपा संसदीय दल के सदस्यों ने उनके नाम का अनुमोदन किया। नामांकन की प्रक्रिया के दौरान जेपी नड्डा, अमित शाह और केंद्र सरकार के कई मंत्री भी मौजूद थे। नामांकन के बाद द्रौपदी मुर्मू ने तमाम विपक्षी नेताओ- सोनिया गांधी, शरद पवार, ममता बनर्जी से बात की और उनसे समर्थन देने को कहा।
ओडिशा के मयूरभंज जिले में जन्मीं द्रौपदी मुर्मू यदि चुनाव में जीत हासिल करती हैं तो वह देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति होंगी। संथाल जनजाति समुदाय से आने वालीं द्रौपदी मुर्मू को सादगी और संघर्ष की जिंदगी के लिए जाना जाता है। 2009 के बाद से अपने पति और दो बेटों समेत कई परिजनों को खोने वालीं द्रौपदी मुर्मू ने कठिन संघर्ष के बीच अपनी बेटियों की परवरिश की थी ।
द्रौपदी मुर्मू के नामांकन के समय यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल खट्टर, हिमंता बिस्वा सरमा, पुष्कर सिंह धामी समेत भाजपा शासित राज्यों के कई मुख्यमंत्री भी पहुंचे थे । महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद द्रौपदी मुर्मू नामांकन के लिए गईं। बता दें कि 1997 में भाजपा में शामिल हुईं द्रौपदी मुर्मू ओडिशा विधानसभा की सदस्य रहीं हैं और नवीन पटनायक की सरकार में मंत्री के तौर पर भी काम कर चुकी हैं। यही नहीं वह झारखंड की पहली महिला राज्यपाल भी थीं।
द्रौपदी मुर्मू के नाम के ऐलान के बाद भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि यह बेहतर होता कि वह निर्विरोध ही चुन ली जातीं। द्रौपदी मुर्मू के नाम के ऐलान के बाद से अब तक नवीन पटनायक, वाईएसआर कांग्रेस के नेता जगन मोहन रेड्डी ने समर्थन का ऐलान किया है। इसके अलावा झारखंड मुक्ति मोर्चा भी अदिवासी महिला के नाम पर समर्थन कर सकती है. ऐसे में उनकी जीत तय मानी जा रही है।
इस मौके पर बीजू जनता दल और वाईएसआर कांग्रेस के कई सांसद भी मौजूद थे. इससे माना जा रहा है कि एनडीए ने द्रौपदी मुर्मू के नामांकन के साथ ही शक्ति प्रदर्शन भी किया। बीजेडी और वाईएसआर कांग्रेस समेत कई दलों के नेताओं की मौजूदगी से साफ है कि नामांकन के साथ ही जीत का दम भी एनडीए ने भरा है।
