महाशिवरात्रि विशेष: शिवरात्रि केवल व्रत और उपवास का पर्व नहीं, बल्कि ध्यान और आत्म-जागृति का अवसर है- स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती

स्वामी शैलेंद्र सरस्वती के साथ विशेष संवाद

पवन सचदेवा,

सोनीपत। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर स्वामी शैलेंद्र सरस्वती से हुई विशेष बातचीत में पशुपतिनाथ और केदारनाथ के गहरे आध्यात्मिक रहस्यों पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि ये दोनों धाम केवल तीर्थस्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना के गूढ़ प्रतीक हैं।

पशुपतिनाथ – शिव के पंचमुखी स्वरूप का रहस्य

नेपाल के काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में पंचमुखी शिवलिंग विराजमान है, जो पांच आध्यात्मिक शक्तियों का प्रतीक है –

  1. सदजोत (पश्चिम) – सृजन शक्ति, ब्रह्मा का प्रतिनिधित्व
  2. वामदेव (उत्तर) – पालन और सुरक्षा, विष्णु का रूप
  3. अघोर (दक्षिण) – विनाश और परिवर्तन, शिव का उग्र स्वरूप
  4. तत्पुरुष (पूर्व) – ध्यान, तपस्या और आत्म-ज्ञान का प्रतीक
  5. ईशान (आकाश) – अद्वैत, सभी दिशाओं में विस्तार और परमानंद

केदारनाथ और पशुपतिनाथ का संबंध

स्वामी जी ने महाभारत के बाद पांडवों द्वारा शिव की खोज की कथा को साझा किया, जिसमें भगवान शिव ने बैल का रूप धारण कर लिया था।
केदारनाथ – शिव के शरीर (पीठ) का पूजन
पशुपतिनाथ – शिव के मुख का पूजन

पूर्ण शिव दर्शन तभी संभव हैं जब दोनों धामों के दर्शन किए जाएं।

चार धाम और चार चक्रों की साधना

स्वामी जी ने बताया कि चार धामों की यात्रा केवल बाहरी तीर्थ नहीं, बल्कि आंतरिक यात्रा भी है
नाभि चक्र – जगन्नाथ पुरी
हृदय चक्र – रामेश्वरम
कंठ चक्र – द्वारका
आज्ञा चक्र – बद्रीनाथ

इन चक्रों के जागरण से सहस्त्रार (पशुपतिनाथ) का उद्घाटन होता है, जो आत्मा की पूर्णता का प्रतीक है।

तत्वदर्शन: महाशिवरात्रि पर ध्यान साधना का महत्व

स्वामी जी ने बताया कि महाशिवरात्रि केवल व्रत और उपवास का पर्व नहीं, बल्कि ध्यान और आत्म-जागृति का अवसर है।
तंत्र मार्ग – शिव की 112 ध्यान विधियाँ विज्ञान भैरव तंत्र में निहित हैं
कुंडलिनी जागरण – आधार चक्र से सहस्त्रार तक की यात्रा
अहंकार से मुक्ति – पशुता से शिवत्व की ओर जाने का मार्ग

महाशिवरात्रि पर विशेष ध्यान शिविर

स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती एवं मां अमृत प्रिया 2 से 8 मार्च तक जबलपुर के ओशो अमृतधाम आश्रम, देवताल में विशेष ध्यान साधना शिविर का संचालन करेंगे, जिसमें देश-विदेश से साधक भाग लेंगे।

“शिव ही शाश्वत हैं, और ध्यान ही उनका सच्चा आराधन है।” – स्वामी शैलेन्द्र सरस्वती