बरेली में फर्जी दस्तावेजों से नौकरी पाने वाली पाकिस्तानी महिला पर केस दर्ज,पुलिस जांच में जुटी

टेलीग्राम संवाद

बरेली, उत्तर प्रदेश। शिक्षा जैसे सम्मानित क्षेत्र में हुई यह चौंकाने वाली घटना कानून और व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। बरेली के फतेहगंज पश्चिमी में एक पाकिस्तानी नागरिक, शुमायला खान, ने फर्जी प्रमाणपत्रों और गलत जानकारी के सहारे सरकारी प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक की नौकरी हासिल कर ली। मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।

जालसाजी की तह तक पहुंची जांच

पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) मुकेश चंद्र मिश्रा के अनुसार, खंड शिक्षा अधिकारी भानु शंकर की शिकायत पर शुमायला खान के खिलाफ धारा 419 (प्रतिरूपण), 420 (धोखाधड़ी), 467 (फर्जी दस्तावेज बनाना), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी), और 471 (फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

खंड शिक्षा अधिकारी भानु शंकर

जांच में यह सामने आया कि शुमायला खान ने 2015 में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में फर्जी प्रमाणपत्र जमा कर सरकारी नौकरी पाई। रामपुर के उपजिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट में उनके निवास प्रमाणपत्र को कूट रचित और त्रुटिपूर्ण पाया गया।

शिक्षा विभाग का बड़ा कदम

शिक्षा विभाग ने प्राथमिक विद्यालय माधौपुर में सहायक अध्यापक के पद पर तैनात शुमायला को न केवल निलंबित किया, बल्कि उनकी नियुक्ति तिथि से पद भी हटा दिया। इसके अतिरिक्त, कई बार स्पष्टीकरण मांगने के बावजूद, उनके दस्तावेज फर्जी पाए गए।

पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा

थाना फतेहगंज पश्चिमी में दर्ज केस के बाद आरोपी शुमायला खान की गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। पुलिस हर संभव कोशिश कर रही है कि इस गहरी साजिश का पर्दाफाश हो और आरोपी को कानून के कटघरे में खड़ा किया जाए।

सवाल उठते हैं…

क्या यह घटना केवल एक व्यक्ति की जालसाजी है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है? क्या अन्य विभागों में भी ऐसे फर्जी नियुक्तियों का खेल चल रहा है? इस मामले ने न केवल शिक्षा व्यवस्था को झकझोर दिया है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बरेली में सामने आया यह मामला शासन और प्रशासन के लिए बड़ा सबक है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे की जांच में और क्या खुलासे होते हैं।