



लोकसभा चुनाव में बंगाल में बना टीएमसी का पसंदीदा नारा
‘मां, माटी, मानुष’ में जोड़ा माछ, मछली मुद्दे को बंगाल में भुना रहीं ममता बनर्जी
(कोलकाता से जेके सिंह)
कोलकाता, टेलीग्रामसंवाद।बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री व राष्ट्रीय जनता दल नेता तेजस्वी यादव ने फिश फ्राई, यानी भुनी हुई मछली, को लेकर एक पोस्ट किया था। बिहार के भाजपा नेताओं ने इसे लपक लिया था पर उनके मुकाबले बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने इसे जोरदार तरीके से थाम लिया है। तृणमूल कांग्रेस का यह नारा बेहद लोकप्रिय हो गया है की माछ भात खाबो बीजेपी के ताड़बो, यानी मछली भात खाएंगे बीजेपी को भगाएंगे।

कभी 80 के दशक में नारा लगा था की आधी रोटी खाएंगे इंदिरा को लायेगे, बस इसी अंदाज में मछली वाला नारा यहां लगाया जा रहा है। भाजपा के नेताओं ने तेजस्वी की आलोचना यह आरोप लगाते हुए किया था कि उन्होंने सावन में मछली खाया है। पर बंगाल में क्या सावन क्या भादो यहां तो मछली के बगैर भोजन ही अधूरा रह जाता है। भात दाल के साथ एक पीस मछली तो होनी ही चाहिए। ऐसे में भला बंगाली मछली की आलोचना कैसे सह लेंगे। इस तरह तृणमूल कांग्रेस के मां- माटी मानुष नारे के साथ मछली भी जुड़ गई है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी कहती है कि कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सवाल किया था की मछली क्यों खाते हैं। कहती है कि हमें क्या खाना है यह तय करने का अधिकार उन्हें किसने दिया है। कूचबिहार में एक सभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा था कि क्या ये लोग मछली खाने पर भी रोक लगा देंगे। तृणमूल कांग्रेस के महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा है कि प्रधानमंत्री बंगाल की संस्कृति से वाकिफ नहीं है। कई ऐसे धार्मिक अनुष्ठान है जो मछली बगैर पूरा ही नहीं हो पाते हैं।

हाल ही में आयकर अधिकारियों ने अभिषेक बनर्जी के हेलीकॉप्टर की तलाशी ली थी। तृणमूल कांग्रेस सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि आयकर विभाग अधिकारी फिश सैंडविच तलाश रहे थे। बात यही नहीं थमी। पहले वैशाख दिन दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस के एक नेता के आवास पर पार्टी दी गई थी। इसमें सिर्फ मछली ही मछली थी। रुई, कतला, वेक्टि और पाबदा आदि वैरायटी की मछलियां परोसी गई थी।
फुटबॉल बंगाल के लोगों का पसंदीदा खेल है। इसमें भी पसंद और नापसंद की टीम का नामकरण मछली के नाम पर ही किया गया है। ईस्ट बंगाल के समर्थक मोहन बागान को चिंगड़ी कहते हैं तो मोहन बागान समर्थक ईस्ट बंगाल को इंलिश यानी हिलसा नाम से पुकारते हैं। चुनावी नारा गढ़ने में बंगाल की एक अपनी पहचान है, पर ऐसा पहली बार हुआ है कि बेचारी मछली भी चुनावी मुद्दा बन गई है।
