सुख की परिभाषा पहले से अधिक विविध व व्यक्तिगत: शैलेंद्र

ओशो फ्रेग्रेंस आश्रम में स्वामी शैलेंद्र सरस्वती जी से बातचीत

पवन सचदेवा

टेलीग्राम संवाद, सोनीपत। कुमाशपुर, दीपलपुर रोड, सोनीपत स्थित ओशो फ्रेग्रेंस आश्रम में स्वामी शैलेंद्र सरस्वती जी से हमारे विशेष प्रतिनिधि पवन सचदेवा की हुई खास बातचीत के कुछ अंश :

स्वामी जी का उत्तर :
आज के युग में सुख की परिभाषा पहले की तुलना में अधिक विविध और व्यक्तिगत हो गई है। तकनीकी प्रगति, वैश्वीकरण, और समाजिक बदलावों ने लोगों के दृष्टिकोण और प्राथमिकताओं को प्रभावित किया है, जिससे सुख की परिभाषा भी समय के साथ बदल गई है। हालांकि, कुछ मौलिक तत्त्व अभी भी स्थायी हैं। आधुनिक युग में सुख की परिभाषा को निम्नलिखित दृष्टिकोणों से समझा जा सकता है:*
  1. आत्म-संतुष्टि और व्यक्तिगत विकास:
    आज के समय में लोग सुख को अपने व्यक्तिगत विकास और आत्म-संतुष्टि के संदर्भ में देखते हैं। आत्म-साक्षात्कार, अपने जीवन के उद्देश्य को समझना, और अपने भीतर के साथ शांति प्राप्त करना सुख के प्रमुख स्रोत माने जाते हैं। व्यक्तिगत आजादी और अपनी शर्तों पर जीने की इच्छा बढ़ी है, और इसी के साथ आत्मनिर्भरता और आत्म-संतुष्टि सुख का महत्वपूर्ण कारक बन गई है।
  2. सामाजिक और डिजिटल कनेक्शन:
    डिजिटल युग में लोग अधिकतर समय इंटरनेट और सोशल मीडिया पर बिताते हैं, जहाँ उन्हें तुरंत मनोरंजन, ज्ञान, और सामाजिक संपर्क मिल जाते हैं। कुछ लोगों के लिए सोशल मीडिया पर मान्यता, लोकप्रियता, और दूसरों के साथ जुड़े रहने का अनुभव भी सुख का एक स्रोत है। हालांकि, यह अस्थायी सुख हो सकता है और इसकी अति मानसिक तनाव का कारण भी बन सकती है।

3.संतुलन और मानसिक शांति:
आज के तेजी से भागते जीवन में, लोग अक्सर मानसिक शांति और संतुलन की तलाश में होते हैं। अत्यधिक काम, तनाव, और प्रतिस्पर्धा के बीच, मानसिक और भावनात्मक संतुलन को बनाए रखना महत्वपूर्ण हो गया है। योग, ध्यान, और माइंडफुलनेस जैसी प्रथाएँ आज के समय में मानसिक शांति प्राप्त करने और सुख की अनुभूति के साधन बन गए हैं।

4.भौतिक सुख और आराम:
भौतिक संपत्ति और सुविधा भी आज के युग में सुख का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। भौतिक संपन्नता, जैसे अच्छा घर, आरामदायक जीवनशैली, तकनीकी गैजेट्स, और आर्थिक स्थिरता, व्यक्ति को संतुष्टि और आराम प्रदान करते हैं। हालांकि, यह सुख स्थायी नहीं होता, और जब भौतिक चीज़ों की चाहत असीम हो जाती है, तो यह अंततः व्यक्ति को अधिक तनाव और असंतोष की ओर ले जा सकती है।

    5. स्वास्थ्य और कल्याण:
    स्वास्थ्य को सुख का एक बड़ा स्रोत माना जाता है। आजकल लोग स्वास्थ्य और फिटनेस पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, क्योंकि एक स्वस्थ शरीर और मन का होना ही सही मायने में सुख का आधार है। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना आधुनिक समय में सुख का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।

    6.अनुभवों पर आधारित सुख:
    पिछले कुछ वर्षों में लोगों का रुझान भौतिक चीज़ों की बजाय अनुभवों पर आधारित सुख की ओर बढ़ा है। यात्रा करना, नई संस्कृतियों को जानना, खास अनुभवों को संजोना और दूसरों के साथ यादें बनाना आधुनिक सुख का नया मापदंड बन गया है। लोग अपने धन और समय को वस्तुओं पर खर्च करने की बजाय अनुभवों पर खर्च करना अधिक सुखद मानते हैं।

      7.संबंधों में सुख:
      अच्छे और सकारात्मक रिश्तों से मिलने वाला सुख आज के युग में भी अत्यधिक मूल्यवान है। परिवार, दोस्तों, और जीवनसाथी के साथ मजबूत और सहायक रिश्ते होना एक व्यक्ति के जीवन में संतोष और सुख का प्रमुख स्रोत होता है। प्रेम, समझ, और सहानुभूति से भरे रिश्ते व्यक्ति को आंतरिक शांति और सुरक्षा का एहसास कराते हैं।

      8.आंतरिक मूल्य और नैतिकता:
      आज भी कई लोग अपने आंतरिक मूल्यों, नैतिकता और जीवन के अर्थ की तलाश को ही सुख का स्रोत मानते हैं। दूसरों की सहायता करना, सामाजिक या परोपकारी कार्यों में हिस्सा लेना, और जीवन को एक बड़ी तस्वीर के रूप में देखना व्यक्ति को आंतरिक संतोष और खुशी दे सकता है।

        9.कार्य और उद्देश्य में खुशी:
        आधुनिक समय में लोग अपने काम या करियर को भी सुख का महत्वपूर्ण स्रोत मानते हैं, लेकिन इसके साथ जीवन में संतुलन बनाए रखना आवश्यक हो गया है। कार्य में अर्थ और उद्देश्य खोजने से व्यक्ति को न केवल आर्थिक संतुष्टि मिलती है, बल्कि मानसिक शांति और संतोष भी प्राप्त होता है। यदि कोई व्यक्ति अपने काम में जुनून और अर्थ पाता है, तो यह उसे दीर्घकालिक सुख दे सकता है।

        10.साधारण जीवन में सुख:
        आज के समय में कुछ लोग इस बात का एहसास कर रहे हैं कि साधारण और सादा जीवन जीना भी सुख का स्रोत हो सकता है। अधिक धन और प्रसिद्धि की दौड़ में भागने की बजाय, साधारण जीवनशैली अपनाकर व्यक्ति कम तनावपूर्ण और शांतिपूर्ण जीवन जी सकता है। “मिनिमलिज्म” और “सस्टेनेबल लिविंग” जैसे विचारों का बढ़ता चलन इस बात का प्रमाण है कि साधारण जीवन भी सुखी हो सकता है।

          निष्कर्ष:
          आज युग में सुख की परिभाषा व्यक्तिगत हो गई है और यह हर व्यक्ति के अनुभवों, मूल्यों और प्राथमिकताओं पर आधारित होती है। कुछ लोग भौतिक संपन्नता में सुख देखते हैं, तो कुछ लोग अनुभवों, रिश्तों या मानसिक शांति में। असल में, सुख का कोई एक निश्चित मापदंड नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन के अनुभवों, इच्छाओं, और जीवन के प्रति दृष्टिकोण के आधार पर बदलता है।